‘लैंसडाउन’ को मिलने जा रहा नया नाम, हरीश रावत ने उत्तराखंड CM धामी को आपत्ति जताते हुए कही ये बात

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उत्तराखंड: हालही में देश में कई जगहों का नाम बदलकर उसे नई पहचान दी गई. इसी तर्ज पर अब यह तैयारियां उत्तराखंड में भी शुरू हो गई हैं. यहां भी कुछ जगहों के नामों को बदलने पर विचार किया जा रहा है. उन्ही में से एक है लैंसडाउन जिसे अब नया नाम दिया जा रहा है. राज्य सरकार के इस फैसले पर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने आपत्ति जाहीर की है.

बता दें कि सबसे ज्यादा देखे जाने वाले हिल स्टेशनों में से एक लैंसडाउन का नाम बदल कर ‘कालो डंडा’ रखाने पर विचार किया जा रहा है, लेकिन अभी के लिए ये नया बदलाव मूल निवासियों के लिए है.

हरीश रावत ने सोशल मीडिया में प्रशासन के इस फैसले को लेकर आवाज उठाई है. उन्होंने इस फैसले को उत्तराखंड के लिए नुकसानदायक बताया है. पूर्व सीएम ने ट्वीट और फेसवुक पर पोस्ट करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री जी मैं आपसे आग्रह कर रहा हूं कि लैंसडाउन का नाम बदलना, उत्तराखंड के लिए नुकसानदायक होगा। अब लैंसडाउन एक विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो रहा है मोस्ट सौट आफ्टर डेस्टिनेशन है उत्तराखंड की इस समय. फिर गढ़वाल रेजिमेंटल सेंटर का घर है.

पहले ही अग्निवीर योजना के जरिए हमारी रेजिमेंटों की परंपरा को समाप्त करने का षड्यंत्र रचा जा चुका है. अब जिस नाम से दुनिया जानती है कि गढ़लाव रेजीमेंट, गढ़वाल के महावीरों का घर लैंसडाउन. हमें नाम की उन बुलंदियों तक पहुंचने में बहुत वक्त लगा है. फिर आज समय बदल गया है. जिनके हम गुलाम रहे उस देश का प्रधानमंत्री आज भारतीय मूल का एक हिंदू है, जिस पर हमको गर्व होना चाहिए. फिर किस-किस नाम को बदलेंगे! जॉर्ज एवरेस्ट, जिम कॉर्बेट, रानीखेत और नैनीताल के क्लब जो अंग्रेजों की परंपरा से जुड़े हुए हैं! रानीखेत और मसूरी का कैथोलिक चर्च!

जानें लैंसडाउन का नया नाम क्यों पड़ा

अंग्रेजों की ओर से लैंसडाउन में नाम बदलने से पहले इसे कालों डंडा के नाम से जाना जाता था. रक्षा मंत्रालय ने उत्तराखंड के छावनी क्षेत्रों में आने वाले कस्बों, सड़कों आदि के ब्रिटिश काल के नामों की जानकारी मांगी है और संबंधित लोक संस्कृति के अनुसार उनका नाम बदलने पर विमर्श किया जा रहा है.

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