Uttarakhand Foundation Day 2022: साल 1897 से राज्य में उठी थी आजादी की आग, जानें इसका पूरा इतिहास

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उत्तराखंड: देवभूमि में 9 नवंबर यानी आज के दिन को स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाता है. 9 नवंबर 2000 को उत्तराखंड उत्तरप्रदेश से निकल के एक नया और अलग राज्य बना था. आज के दिन उत्तराखंड ने अपनी स्थापना के 22 वर्ष पूरे कर लिए हैं. उत्तर-पश्चिम के कई हिस्सों के साथ हिमाचल पर्वत श्रंखला को मिलकर कर उत्तराखंड राज्य का गठन किया गया. उस दौरान राज्य को उत्तरांचल के नाम से जाना जाता था. स्थापना दिवस के कुछ साल बाद यह उत्तराखंड के नाम से प्रचलित हुआ.

उत्तराखंड स्थापना दिवस को लेकर राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी लोगों को बधाईयां दी है. उन्होंने ट्विट कर लिखा कि समस्त प्रदेशवासियों को राज्य स्थापना दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं ! आज के दिन ”युवा उत्तराखण्ड” अपनी स्थापना के 22 वर्ष पूर्ण कर चुका है और हम प्रगति के पथ पर अग्रसर होते हुए नित नए लक्ष्यों को प्राप्त कर रहें हैं। जय हिंद! जय उत्तराखंड!

उत्तराखंड राज्य के अलग होने की कहानी भी उत्तराखंड की वादियों की तरह रोचक है. दरअसल उत्तराखंड को अलग करने की मांग तब उठी जब देखा गया कि उस वक्त की तत्कालीन सरकार हिमालयी क्षेत्र के लोगों के हितों को पूरा करने और समझने में खरी नहीं उतरी. बुनियादी ढ़ाचे में गड़बड़ी, बेरोजगारी, मूल लोगों के प्रवास और विकास की कमी के चलते एक अलग पहाड़ी राज्य की मांग तेज हो गई. इसके कारण उत्तराखंड क्रांति दल का गठन किया गया और अलग राज्य की मांग ने पूरे पहाड़ी इलाके में एक आंदोलन का रूप ले लिया.

उत्तराखंड राज्य पाने के लिए इन आंदोलनकारियों ने काफी संघर्ष किया था. कई इलाकों में लाठिया और गोलियां बरस गई थीं. 42 शहादतों के बाद उत्तराखंड राज्य बना. एक पहाड़ी राज्य को तैयार करने के लिए कई नेताओं औऱ राज्य आंदोलनकारियों का अपना योगदान देना पड़ा, जिन्हें यहां के नागरिक कभी भी नहीं भूल पाएंगे.

राज्य में 22वां स्थापना दिवस बहुत ही धूमधाम से मनाया जा रहा है. राज्य ने आज अपने 23वें साल में प्रवेश किया है. उत्तराखंड को बनाने के लिए बहुत नेताओं और आंदोलनकारियों ने अपना खून-पसीना एक किया है. कई वर्षों से इसे अलग करने की मांग उठती आ रही है. आइए जानतें हैं कि इसके इतिहास के बारे में-

उत्तराखंड के अलग होने की गाथा

  • उत्तराखंड को एक अलग पहाड़ी राज्य बनाने की मांग सबसे पहले सन् 1897 में उठाई गई थी. उस वक्त पहाड़ी इलाकों के लोगों ने तत्कालीन महारानी को बधाई संदेश भेजा था.
  • इसके समझ उनके सामने लोगों ने संदेश के साथ इस क्षेत्र के सांस्कृतिक और पर्यावरणीय आवश्यकताओं के अनुसार एक अलग पहाड़ी राज्य बनाने की मांग रखी.
  • इसके बाद सन् 1923 में जब उत्तर प्रदेश के संयुक्त राज्य का हिस्सा हुआ करता था, तब राज्य के राज्यपाल को भी अलग पहाड़ी प्रदेश बनाने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा गया था. इसमें पहाड़ की आवाज को सबसे सामने रखा जा सके.
  • कांग्रेस के मंच पर सन् 1928 में अलग पहाड़ी राज्य बनाने की मांग उठाई गई थी.
  • इसके बाद भी इसे सन् 1930 में भी श्रीनगर गढ़वाल में आयोजित कांग्रेस के अधिवेशन में शामिल हुए पंडित जवाहरलाल नेहरू का समर्थन प्राप्त हुआ.
  • सन् 1946 में कुमाऊ के बद्रीदत्त पांडेय ने एक अलग प्रशासनिक इकाई के तौर पर गठन की मांग की थी.
  • सन् 1950 से पहाड़ी क्षेत्र को एक अलग राज्य की मांग को लेकर हिमाचल प्रदेश के संग मिलकर जन विकास समिति के माध्यम से शुरू हुआ पहाड़ राज्य की मांग को लेकर पार्टी उत्तराखंड का गठन हो गया.
  • वाजपेयी सरकार में ही उत्तराखंड को 27वां राज्य बनाया गया था. इसके साथ ही उन्होंने राज्य को औद्योगिक पैकेज की सौगात भी दी थी. वहीं राज्य को विशेष राज्य का दर्जा भी मिला था.
  • इसके बाद तो उत्तराखंड को अलग राज्य बनाने की मांग को रफ्तार मिल गई. तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की ओर से कौशिक समिति का गठन किया गया. इसके बाद 9 नवंबर 2000 में एक अलग पहाड़ी राज्य बना दिया गया.
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