गढ़वाल: 26 सालों तक बच्चों को पढ़ा रहा था नकली टीचर, रिटायरमेंट के बाद हुआ भंडाफोड़

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उत्तराखंड: राज्य में फर्जी दस्तावेजों से जुड़ा एक घोटाला सामने आया है. एक व्यक्ति शिक्षा विभाग में नौकरी पूरी करने के बाद रिटायमेंट लेकर पेंशन का लाभ ले रहा था. केस ओपन होने पर अब कोर्ट ने तथाकथित टीचर के खिलाफ 7 साल का कारावास और 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाने की सजा सुनाई है.

जानें पूरा मामला

इस पूरे मामले की जानकारी देते हुए अभियोजन अधिकारी अजय सिंह रावत ने कहा कि आरोपी हरिओम सिंह पुत्र खुशीराम, निवासी ग्राम रामपुर रसरपुर, जिला बिजनौर, यूपी के खिलाफ थाना थत्युड़ में यशवीर सिंह ने 15 अगस्त, 2018 को आईपीसी की धारा 420, 467, 471 के अंतर्गत पूरा केस दर्ज करवाया था.

इसमें बताया गया कि रिटायर्ड प्रधानाध्यापक द्वारा अपनी पहली नियुक्ति में शिक्षा विभाग को दिए गये दस्तावेजों में समानता नहीं है. प्रथम नियुक्ति के समय कुछ वांछित अभिलेख भी प्रस्तुत नहीं किए गए. इसके बाद भी उन्होंने प्राथमिक विद्यालय सेंदूल जौनपुर, टिहरी गढ़वाल में पहली नियुक्ति ले ली. इसके बाद 31 मार्च 2016 को हरिओम सिंह राजकीय प्राथमिक विद्यालय डांगू, जौनपुर, टिहरी गढ़वाल से सेवानिवृत्त हो गए.

शिक्षक के सभी दस्तावेजों की जांच करने के पश्चात पुलिस ने सभी प्रमाणपत्रों की जांच कर 10 दिसंबर 2018 को आरोप पत्र कोर्ट में पेश किए. इन प्रमाणपत्रों की जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के बाद सहायक अभियोजन अधिकाररी ने कहा कि अभियुक्त ने कूट रचित दस्तावेजों के सहारे 12 दिसंबर 1990 में शिक्षा विभाग में नौकरी प्राप्त की थी.

अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट/अपर सीनियर सिविल जज अविनाश कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद शिक्षक हरिओम को दोष सिद्ध पाते हुए सात साल का कठोर कारावास और 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है.

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